यदि आप एक Blogger हैं और आपके मन में यह सवाल आ रहा है कि Canonical Tag Kya Hai?, Canonical Tag Kaise Banate Hain?, SEO में Canonical Tag क्यों जरूरी होता है? और इसके क्या फायदे हैं? तो आप बिल्कुल सही जगह पर आए हैं।
आज के समय में Duplicate Content एक बड़ी SEO समस्या है, और इसी समस्या का सबसे सही समाधान है Canonical Tag। यह सर्च इंजन को बताता है कि एक ही जैसे कई URL में से कौन-सा URL असली (Original) और प्राथमिक है।
इस लेख में हम सरल और आसान भाषा में समझेंगे –
- Canonical Tag क्या होता है
- यह कैसे काम करता है
- SEO में इसकी क्या भूमिका है
- और आपके ब्लॉग की रैंकिंग बढ़ाने में यह कैसे मदद करता है
अगर आप चाहते हैं कि आपकी वेबसाइट गूगल में बेहतर रैंक करे और Duplicate Content की समस्या से बचे, तो यह लेख आपके लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए इस पोस्ट को अंत तक जरूर पढ़ें और Canonical Tag की पूरी जानकारी हासिल करें।
Table of Contents
Canonical URL क्या होता है? (Canonical Tag Kya Hai)

Canonical Tag को सही से समझने के लिए सबसे पहले यह जानना जरूरी है कि Canonical URL क्या होता है। इसके बिना Canonical Tag की पूरी अवधारणा समझ पाना थोड़ा मुश्किल हो सकता है।
Canonical URL उस वेबपेज का मुख्य (Main) और मूल वर्जन होता है, जिसे Google जैसे सर्च इंजन डुप्लिकेट या लगभग एक जैसे कई पेजों में से प्राथमिकता (Priority) देकर Index और Rank करते हैं।
दरअसल, Google ऐसे पेजों को बार-बार सर्च रिजल्ट में दिखाना नहीं चाहता जो एक ही तरह का कंटेंट दिखाते हों और कोई नई या यूनिक वैल्यू न देते हों।
इसी वजह से जब Google को आपकी वेबसाइट पर एक जैसे या मिलते-जुलते कई URL मिलते हैं, तो वह उनमें से एक को Canonical URL के रूप में चुनता है और उसी को पूरे कंटेंट का प्रतिनिधि (Representative) मानता है।
उदाहरण के लिए:
- Canonical URL: https://example.com/blog/
- Alternate URL: https://example.com/blog/?page=1
इस स्थिति में Google आमतौर पर पहले वाले URL को ही Indexing और Ranking के लिए Canonical मानता है। इसी को Principal, Primary या Representative Page भी कहा जाता है, और इस पेज को ही Canonical Page कहा जाता है।
Note: यह जरूरी नहीं कि Google हमेशा वही Canonical चुने जो आप चाहते हैं। लेकिन आप Canonical Tag का सही उपयोग करके Google को यह संकेत दे सकते हैं कि आपके अनुसार कौन-सा URL मुख्य (Canonical) होना चाहिए।
इससे Duplicate Content की समस्या कम होती है और आपकी वेबसाइट की SEO Performance बेहतर होती है।
Canonical Tag क्या होता है? (SEO की वो ताकत जिसे जानना हर Blogger के लिए ज़रूरी है)
क्या आपकी वेबसाइट पर एक ही जैसा कंटेंट अलग-अलग URL पर दिख रहा है? और क्या आपको डर है कि कहीं यही वजह आपकी Google Ranking गिरने का कारण तो नहीं? तो यहाँ समझना बेहद ज़रूरी है Canonical Tag को।
Canonical Tag, जिसे rel=”canonical” टैग भी कहा जाता है, एक छोटा-सा लेकिन बेहद शक्तिशाली HTML कोड होता है, जो सर्च इंजन को यह साफ-साफ बताता है कि एक जैसे दिखने वाले कई वेबपेजों में से असली और मुख्य (Original) पेज कौन-सा है।
डुप्लिकेट कंटेंट SEO की सबसे बड़ी समस्याओं में से एक है। इसी समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए फरवरी 2009 में Google, Yahoo और Microsoft ने मिलकर Canonical Tag की शुरुआत की थी।
SEO की दुनिया में Canonical Tag का मतलब है:
- Google को सही पेज Index कराने का संकेत
- Link Equity को एक ही URL पर मजबूत बनाना
- और SERP में वही पेज दिखाना जिसे आप रैंक कराना चाहते हैं
यह टैग वेबपेज के सेक्शन में इस तरह दिखता है:
सबसे प्रभावशाली रणनीति होती है Self-Referencing Canonical – यानि हर महत्वपूर्ण पेज खुद को ही Canonical घोषित करे।
मान लीजिए आपकी एक E-commerce वेबसाइट है, जिसमें एक ही प्रोडक्ट के Mobile और Desktop वर्ज़न अलग-अलग URL पर हैं।
अब अगर आप चाहते हैं कि Google आपके Mobile Page को प्राथमिकता दे, तो उसी पेज में Self-Referencing Canonical Tag लगाकर आप सर्च इंजन को साफ संकेत देते हैं:
“यही है मेरा असली पेज, इसी को Rank करना है।”
एक बार जब Canonical Tag सही तरीके से लागू हो जाता है, तो सर्च इंजन खुद समझ जाता है कि किस पेज को Ignore करना है और किसे SERP में चमकाना है।
यही वजह है कि Canonical Tag सिर्फ एक टेक्निकल टैग नहीं, बल्कि आपकी Ranking को बचाने और बढ़ाने का एक SEO Shield है।
कैनोनिकल टैग की आसान और साफ़ परिभाषा
कैनोनिकल टैग दरअसल आपके ब्लॉग के Head Section में लगाया जाने वाला एक ऐसा HTML कोड होता है, जो सर्च इंजन को साफ-साफ बता देता है कि इनमें से असली और मुख्य (Main) URL कौन-सा है।
यानी Google को यह संकेत मिल जाता है कि इसी URL को Index और Rank करना है, बाकी जो उससे मिलते-जुलते या डुप्लीकेट URL हैं, उन्हें इग्नोर किया जाए।
सीधी भाषा में कहें तो, जिस भी URL को आप Canonical Tag में सेट करते हैं, वही आपके वेबपेज का Original और Primary Version माना जाता है। उसके अलावा जितने भी दूसरे URL उसी कंटेंट को दिखा रहे होते हैं, वे सब उसी Main URL के डुप्लिकेट समझे जाते हैं।
कैनोनिकल टैग का इस्तेमाल क्यों किया जाता है?
अब तक आप समझ चुके हैं कि Canonical Tag क्या होता है, तो चलिए जानते हैं कि इसकी ज़रूरत क्यों पड़ती है।
अक्सर ऐसा होता है कि एक ही ब्लॉग पोस्ट या वेबपेज अलग-अलग URL से खुलने लगता है। यही वजह है कि एक ही कंटेंट के कई वर्ज़न बन जाते हैं और वहाँ से शुरू होती है Duplicate Content की समस्या।
जब सर्च इंजन एक जैसे या बहुत मिलते-जुलते कंटेंट वाले कई URL को क्रॉल करता है, तो इससे SEO पर सीधा असर पड़ता है।
पहली बात, ज़्यादा डुप्लिकेट पेज होने से Google का क्रॉलर आपका कुछ ज़रूरी कंटेंट ठीक से क्रॉल ही नहीं कर पाता।
दूसरी बात, एक ही कंटेंट कई जगह बंट जाने से आपकी रैंकिंग पावर भी कमजोर हो जाती है।
और मान लीजिए आपका आर्टिकल रैंक भी कर जाए, तब भी खतरा रहता है कि सर्च इंजन किसी गलत URL को “Main Version” मान ले।
यहीं पर Canonical Tag काम आता है। यह Google को साफ बता देता है कि असली और प्राथमिक पेज कौन-सा है, जिससे डुप्लिकेट कंटेंट कंट्रोल में रहता है और आपकी SEO स्ट्रेंथ सही जगह कंसन्ट्रेट होती है।
URL के साथ होने वाली असली समस्या
अक्सर लोग सोचते हैं, “कोई एक ही पेज की इतनी कॉपी क्यों बनाएगा?” और इसी गलतफहमी में यह मान लेते हैं कि Canonicalization जैसी चीज़ उनके लिए ज़रूरी नहीं है।
लेकिन दिक्कत यहाँ से शुरू होती है कि हम इंसान किसी वेबपेज को एक ही पेज के रूप में देखते हैं, जैसे आपकी वेबसाइट का Home Page। जबकि सर्च इंजन हर अलग-अलग URL को एक अलग वेबपेज मानते हैं।
मान लीजिए आपका होमपेज इन URL से खुल रहा है:
- http://www.example.com (बिना SSL)
- https://www.example.com
- http://example.com (बिना www)
- http://example.com/amp (AMP वर्जन)
- https://www.example.com/?m=1 (Blogger का मोबाइल वर्जन)
आपके लिए ये सब एक ही पेज हैं, लेकिन Google के लिए ये पाँच अलग-अलग पेज हैं। यानी एक ही कंटेंट की पाँच कॉपियाँ।
और यह तो सिर्फ एक छोटा-सा उदाहरण है। आज के Modern CMS और Dynamic वेबसाइटें अपने आप अलग-अलग पैरामीटर, टैग और वर्ज़न बना देती हैं, जिससे एक ही पेज के सैकड़ों या हज़ारों URL बन सकते हैं और आपको पता भी नहीं चलता।
यहीं पर Canonical Tag आपकी मदद करता है। यह सर्च इंजन बॉट्स को साफ बता देता है कि इन सब में से असली और Main URL कौन-सा है।
इसी वजह से Google Search Console में Duplicate Content या Canonical Issue जैसी परेशानियाँ नहीं आतीं और आपकी SEO सही दिशा में चलती रहती है।
Canonical Tag के ज़बरदस्त फायदे (हर Blogger को क्यों अपनाना चाहिए)
Canonical Tag सिर्फ एक टेक्निकल कोड नहीं है, बल्कि यह आपकी वेबसाइट की SEO सेहत का एक मजबूत सुरक्षा कवच है। इसका सही इस्तेमाल आपकी रैंकिंग को बचा भी सकता है और बढ़ा भी सकता है।
इसके कुछ सबसे बड़े फायदे ये हैं:
✅ Duplicate Content से पूरी सुरक्षा: एक ही कंटेंट के कई URL बनने से जो SEO को नुकसान होता है, Canonical Tag उसे जड़ से खत्म कर देता है।
✅ Google Ranking में मजबूती: जब सर्च इंजन को साफ पता होता है कि Main Page कौन-सा है, तो आपकी पूरी Link Power उसी एक URL पर फोकस होती है, जिससे रैंकिंग तेज़ी से सुधरती है।
✅ सही और फास्ट Indexing: Canonical Tag की वजह से Google Bot सही पेज को जल्दी और सही तरीके से Index करता है, बिना कन्फ्यूज़ हुए।
✅ सर्च इंजन को Clear Direction: Google को यह बिल्कुल साफ संकेत मिलता है कि किस URL को Rank करना है और किसे Ignore करना है, जिससे Canonical Issue और Crawling Waste दोनों से छुटकारा मिलता है।
यही कारण है कि अगर आप चाहते हैं कि आपका ब्लॉग प्रोफेशनल लेवल का दिखे और Google में भरोसे के साथ रैंक करे, तो Canonical Tag को नज़रअंदाज़ करना एक बड़ी गलती हो सकती है।
Canonical Tag कैसे बनाएं? (Step-by-Step आसान तरीका)
अब बात करते हैं उस हिस्से की, जो हर Blogger जानना चाहता है – आखिर Canonical Tag बनाया कैसे जाता है और वेबसाइट में लगाया कैसे जाता है?
घबराने की बिल्कुल जरूरत नहीं है। यह उतना ही आसान है जितना किसी फॉर्म में URL डालना। बस नीचे दिए गए स्टेप्स को ध्यान से फॉलो करें।
Step #1 – सबसे पहले किसी भरोसेमंद Canonical Tag Generator वेबसाइट पर जाएँ।
Step #2 – वहाँ आपको एक बॉक्स मिलेगा, जिसमें आपको अपनी वेबसाइट या पेज का URL डालना होगा और Submit बटन पर क्लिक करना होगा।
Step #3 – जैसे ही आप Submit करेंगे, आपके सामने तुरंत आपका Canonical Tag तैयार हो जाएगा। अब बस इस कोड को कॉपी करें और अपनी वेबसाइट की Theme के Head Section में पेस्ट कर दें।
बस इतना करते ही आपने Google को साफ संकेत दे दिया कि “यही मेरा Main Page है, इसी को Rank करना है।”
इतनी सी छोटी-सी सेटिंग आपकी पूरी वेबसाइट की SEO Direction सही कर सकती है।
Blogger में Canonical Tag कैसे Add करें? (गलती जो आपकी रैंकिंग रोक सकती है)
ज़्यादातर Blogger यह मान लेते हैं कि Canonical Tag अपने आप सेट होता है। और सच भी है—कई Themes में यह पहले से मौजूद होता है।
लेकिन समस्या तब आती है जब आप ऐसी Theme इस्तेमाल कर रहे होते हैं, जिसमें Canonical Tag सही तरीके से लगा ही नहीं होता।
ऐसी स्थिति में Google Search Console में Canonical Issue दिखने लगता है और आपकी Ranking बिना वजह अटक सकती है।
अगर आप चाहते हैं कि Google को बिल्कुल साफ पता हो कि आपका असली और Main URL कौन-सा है, तो यह सेटअप करना बेहद ज़रूरी है।
नीचे दिए गए आसान स्टेप्स फॉलो करें:
Step 1: सबसे पहले अपने Blogger Dashboard में Log In करें और बायीं तरफ दिए गए Theme ऑप्शन पर क्लिक करें।
Step 2: अब Edit HTML पर क्लिक करें।
Step 3: आपके सामने पूरी Theme की HTML File खुल जाएगी। यहाँ Ctrl + F दबाकर सेक्शन खोजें।
Step 4: टैग के ठीक नीचे अपना Canonical Tag Code पेस्ट कर दें और Theme को Save कर दें।
बस! इतना करते ही आपने Google को यह साफ-साफ बता दिया कि “यही मेरा Main Page है, बाकी सब इसके वर्ज़न हैं।”
एक छोटा-सा टैग, लेकिन आपकी पूरी SEO Direction को सही लाइन पर ले जाने की ताकत रखता है।
WordPress में Canonical Tag कैसे Add करें? (2 मिनट में SEO को Strong बनाएं)
अगर आपकी वेबसाइट WordPress पर है, तो आपके लिए Canonical Tag सेट करना सबसे आसान कामों में से एक है। वजह साफ है—ज़्यादातर SEO Plugins पहले से ही यह सुविधा देते हैं।
लेकिन सवाल यह है कि आप सही URL को Canonical बना रहे हैं या नहीं? क्योंकि एक छोटी-सी गलती भी आपकी Ranking Power को गलत पेज पर भेज सकती है।
इसीलिए नीचे Yoast SEO और Rank Math SEO – दोनों में Canonical Tag सेट करने का सही तरीका बताया गया है:
Yoast SEO Plugin में Canonical URL कैसे सेट करें?
- जिस पोस्ट या पेज पर Canonical सेट करना है, उसे Edit करें।
- नीचे Yoast SEO बॉक्स में जाएं।
- Advanced टैब पर क्लिक करें।
- यहाँ आपको Canonical URL का ऑप्शन मिलेगा।
- जिस URL को आप Main बनाना चाहते हैं, उसे यहाँ डाल दें।
Rank Math SEO Plugin में Canonical URL कैसे सेट करें?
- पोस्ट या पेज को Edit करें।
- नीचे Rank Math SEO बॉक्स खोलें।
- Advanced सेक्शन पर क्लिक करें।
- यहाँ आपको Canonical URL का ऑप्शन दिखेगा।
- अपना Preferred URL यहाँ सेट कर दें।
जरूरी बात (ध्यान से पढ़ें)
WordPress SEO Plugins में Canonical Tag पहले से लगा होता है, इसलिए आमतौर पर कुछ करने की ज़रूरत नहीं होती। लेकिन अगर आपके पेज के कई वर्ज़न बन रहे हैं या आप किसी खास URL को Rank कराना चाहते हैं, तो Canonical बदलना आपकी SEO Strategy का एक Smart Move बन सकता है।
याद रखें — Canonical Tag सही जगह लगा, तो पूरी Ranking Power सही URL पर जाएगी। गलत जगह लगा, तो मेहनत किसी और पेज को Rank करा देगी।
Canonical Tag SEO के लिए क्यों इतना ज़रूरी है?
Canonical Tag किसी भी मजबूत SEO Strategy का एक अहम हिस्सा होता है। यही वो छोटा-सा टैग है जो आपकी वेबसाइट को Google में सही दिशा में रैंक दिलाने में मदद करता है।
सबसे पहले तो यह सर्च इंजन को साफ बता देता है कि एक जैसे कई URL में से असली और सही वर्ज़न कौन-सा है। इससे Duplicate Content रैंक होने से रुकता है और Google को यह कन्फ्यूजन नहीं रहता कि किस पेज को Index करना है।
इसके अलावा Canonical Tag कई और तरीकों से भी आपकी SEO को सपोर्ट करता है:
Syndicated Content को सही तरह से मैनेज करना
अगर आप अपना कंटेंट दूसरी वेबसाइट्स पर पब्लिश या सिंडिकेट करते हैं, तो Canonical Tag की मदद से आप Google को यह बता सकते हैं कि Original Source कौन-सा है। इससे सर्च इंजन हमेशा आपके ओरिजिनल पेज को ही प्राथमिकता देता है।
बेहतर Ranking (Improved Rankings)
जब एक ही आर्टिकल या पेज के कई URL बन जाते हैं, तो आपकी Link Power बंट जाती है। Canonical Tag उस पूरी ताकत को एक ही Main URL पर फोकस कर देता है, जिससे रैंकिंग मजबूत होती है।
Traffic Tracking में आसानी
मान लीजिए आपकी साइट www और बिना www दोनों से खुलती है। Canonical Tag की वजह से आप साफ देख पाते हैं कि कौन-सा वर्ज़न असली माना जा रहा है और किस पर ज़्यादा ट्रैफिक आ रहा है।
Regular और सही Crawling
जब आप किसी पेज को Canonical सेट करते हैं, तो सर्च इंजन बॉट्स उसी URL को बार-बार और सही तरीके से क्रॉल करते हैं। Google को यह साफ समझ आ जाता है कि यही वो कंटेंट है जिसे Index करना है और यूज़र्स को दिखाना है।
सीधी बात यह है— Canonical Tag सही लगा है, तो Google को कोई कन्फ्यूजन नहीं, आपकी रैंकिंग सही पेज को मिलेगी और आपकी पूरी SEO मेहनत सही जगह काम करेगी।
Duplicate Pages को Canonical Page पर कैसे Redirect करें?
Redirect का मतलब होता है सर्च इंजन और यूज़र्स को अपने आप एक URL से दूसरे सही URL पर भेज देना।
अगर आपके पास किसी पेज के एक से ज़्यादा वर्ज़न हैं और आपको उन Alternate URLs की अलग से ज़रूरत नहीं है, तो Canonical लगाने से भी बेहतर तरीका है उन्हें सीधे Redirect कर देना। इससे डुप्लिकेट पूरी तरह कंट्रोल में आ जाता है और SEO भी क्लीन रहता है।
सबसे आम उदाहरण है HTTP और HTTPS वाला केस।
आज Google HTTPS को ज़्यादा सुरक्षित और भरोसेमंद मानता है, इसलिए आपकी साइट का HTTP वर्ज़न सीधे HTTPS वर्ज़न पर Redirect होना चाहिए। इससे Google को कोई कन्फ्यूजन नहीं रहता कि कौन-सा पेज Main है।
तेज़ और सही रिज़ल्ट के लिए Google 3xx Server-Side Redirects को रिकमेंड करता है, खासकर 301 Redirect को।
जब आप अपने Duplicate Pages को 301 से Main (Canonical) Page पर Redirect करते हैं, तो पूरी Ranking Power भी उसी एक URL पर ट्रांसफर हो जाती है।
सीधी भाषा में कहें तो— जिस पेज को आप Rank कराना चाहते हैं, उसी पर सबको भेज दो। यही साफ-सुथरा और सबसे सुरक्षित SEO तरीका है।
निष्कर्ष – Canonical Tag क्या है और क्यों आपकी SEO की रीढ़ है
Canonical Tag सिर्फ एक टेक्निकल कोड नहीं, बल्कि आपकी वेबसाइट को Duplicate Content, Crawl Budget Waste और बड़ी-बड़ी SEO गलतियों से बचाने वाली एक मजबूत ढाल है।
अगर आप सच में चाहते हैं कि Google आपकी साइट को बिना कन्फ्यूज़ हुए सही तरीके से समझे, सही पेज को Index करे और वही पेज Top पर रैंक करे जिसे आप रैंक कराना चाहते हैं, तो Canonical Tag को नज़रअंदाज़ करना एक बड़ी गलती हो सकती है।
याद रखें — छोटी सी Canonical सेटिंग, लेकिन असर पूरी वेबसाइट की रैंकिंग पर पड़ता है।
अगर आपके मन में अब भी Canonical Tag से जुड़ा कोई सवाल है, तो बेझिझक कमेंट में पूछिए।
और अगर यह गाइड आपके लिए ज़रा-सी भी मददगार रही हो, तो इसे अपने दोस्तों और सोशल मीडिया पर ज़रूर शेयर करें — हो सकता है आपकी एक शेयर किसी और की SEO की बड़ी समस्या सॉल्व कर दे।