Bounce Rate Kya Hai: High Bounce Rate क्यों होता है? इसे कम करने के 8 Proven SEO Tips: अगर आप ब्लॉगर हैं तो आपने “Bounce Rate” जरूर सुना होगा।
सरल भाषा में — Bounce Rate वह प्रतिशत है जो बताता है कि आपकी साइट पर आए कितने विज़िटर बिना किसी दूसरे पेज पर जाए वापस चले गए। मतलब यूज़र सिर्फ एक पेज देख कर निकल गया यही बाउंस माना जाता है।
क्यों ध्यान दें? क्योंकि हाई बाउंस रेट से आपकी साइट की यूज़र-एंगेजमेंट घटती है, सर्च इंजन सिग्नल्स पर असर पड़ता है और ब्लॉग से कम कमाई-मौके बनते हैं।
इस लेख में आप जानेंगे कि Bounce Rate Kya Hai, यह कैसे मापा जाता है, इसके बढ़ने से ब्लॉगर को क्या नुकसान होता है और सबसे जरूरी — Bounce Rate कम कैसे करें (प्रैक्टिकल, आसान तरीके) — ताकि आपका ब्लॉग पढ़ने लायक बने और Google में बेहतर रैंक करे।
इस लिए आप इस लेख को अंत तक जरूर पढ़ें।
Table of Contents
Bounce Rate क्या है? (Bounce Rate Kya Hai)

Bounce Rate दो शब्दों से मिलकर बना है – Bounce यानी “उछलना या वापस लौट जाना” और Rate यानी “दर या प्रतिशत।”
सरल शब्दों में, आपकी वेबसाइट या ब्लॉग का Bounce Rate उस प्रतिशत को दर्शाता है, जिसमें विज़िटर आपकी साइट पर आते तो हैं,
लेकिन किसी अन्य पेज पर क्लिक किए बिना सीधे वापस चले जाते हैं। यानी, यूज़र आपकी साइट पर सिर्फ एक ही पेज देखकर बाहर निकल जाते हैं।
Bounce Rate की परिभाषा (Bounce Rate Definition in Hindi)
Bounce Rate को सरल शब्दों में इस तरह समझा जा सकता है – जब कोई विज़िटर आपकी वेबसाइट पर आता है और बिना किसी दूसरे पेज पर जाए, सीधे उसी पेज से वापस चला जाता है, तो उस स्थिति को Bounce कहते हैं।
किसी वेबसाइट पर आने वाले ऐसे विज़िटर्स का औसत प्रतिशत ही Bounce Rate कहलाता है।
उदाहरण के लिए – मान लीजिए आपकी वेबसाइट पर 100 लोग आते हैं और उनमें से 70 लोग बिना किसी और लिंक या पेज को खोले वापस चले जाते हैं। इसका मतलब है कि आपकी वेबसाइट का Bounce Rate 70% है।
आसान शब्दों में कहें तो, Bounce Rate यह बताता है कि कितने यूज़र्स आपकी वेबसाइट पर सिर्फ एक ही पेज देखकर वापस चले गए।
अच्छा Bounce Rate क्या होता है?
अच्छा Bounce Rate हर वेबसाइट के प्रकार के अनुसार अलग-अलग होता है।
E-commerce वेबसाइट के लिए यदि आपका Bounce Rate 20% से कम है, तो इसे बहुत अच्छा माना जाता है।
वहीं, Blog वेबसाइट के लिए 65% से कम Bounce Rate सही और संतुलित माना जाता है।
हालाँकि, केवल अपने Bounce Rate को देखकर चिंतित होने के बजाय, सबसे पहले अपने Competitors के Bounce Rate को ज़रूर चेक करें। इससे आपको यह समझने में मदद मिलेगी कि आपकी वेबसाइट का प्रदर्शन इंडस्ट्री स्टैंडर्ड के अनुसार कैसा है।
अब तक आपने यह जान लिया है कि Bounce Rate क्या है और अच्छा Bounce Rate कितना होना चाहिए। आगे हम आपको बताएंगे कि आप अपने ब्लॉग या वेबसाइट का Bounce Rate कैसे कम कर सकते हैं।
Bounce Rate कम कैसे करें?

अगर आप एक ब्लॉगर हैं, तो आपके लिए यह जानना बेहद ज़रूरी है कि ब्लॉग का बाउंस रेट कम रखना क्यों महत्वपूर्ण है। ज्यादा बाउंस रेट का मतलब है कि विज़िटर आपकी वेबसाइट पर आकर बिना किसी और पेज पर जाए सीधे बाहर निकल रहे हैं।
इसीलिए, आज मैं अपने ब्लॉगिंग अनुभव से कुछ खास टिप्स आपके साथ शेयर करने जा रहा हूँ, जिनकी मदद से आप आसानी से अपने ब्लॉग का बाउंस रेट कम कर सकते हैं।
और विज़िटर्स को लंबे समय तक अपनी साइट पर रोक सकते हैं।
तो चलिए, बिना समय गंवाए जानते हैं वो बेहतरीन टिप्स जो आपके ब्लॉग की परफॉर्मेंस को और बेहतर बना देंगी।
#1 – Content को यूनिक और Readable कैसे बनाएं?
अगर आपके ब्लॉग पर आने वाले विज़िटर्स जल्दी-जल्दी साइट छोड़कर चले जाते हैं, तो इसका सबसे बड़ा कारण आपका Content का यूनिक और Readable न होना हो सकता है।
यूज़र्स हमेशा वही ब्लॉग पढ़ना पसंद करते हैं, जहाँ उन्हें जानकारी सरल, आकर्षक और आसानी से समझ आने वाली भाषा में मिले। खासकर जब आर्टिकल में बहुत बड़े-बड़े वाक्य लिखे होते हैं, तो पाठक घबरा जाते हैं और पेज छोड़ देते हैं।
इसलिए जरूरी है कि आप अपने Content को न केवल यूनिक बनाएं, बल्कि उसकी Readability पर भी ध्यान दें। जब यूज़र्स को आपका Content सहज और रोचक लगेगा, तो उनका अनुभव बेहतर होगा और वे बार-बार आपके ब्लॉग पर आना चाहेंगे।
Content को Readable बनाने के लिए जरूरी टिप्स
अपने आर्टिकल की Readability को बेहतर बनाने के लिए इन आसान टिप्स को ज़रूर अपनाएँ।
- Topic को और स्पष्ट बनाने के लिए Sub Headings का प्रयोग करें।
- महत्वपूर्ण पॉइंट्स समझाने के लिए Bullet Points का इस्तेमाल करें।
- जहां ज़रूरी हो, वहां चार्ट्स, इमेज, स्क्रीनशॉट्स और उदाहरण शामिल करें।
- अपने Focus Keyword को कुछ जगहों पर Bold करके लिखें (लेकिन इसका अति प्रयोग न करें)।
- आर्टिकल में यूज़र्स से Questions पूछें, इससे उनका Engagement बढ़ेगा।
- अंत में हमेशा निष्कर्ष (Conclusion) दें, ताकि पाठक समझ सकें कि उन्होंने इस आर्टिकल से क्या सीखा।
- आप अपने ब्लॉग की Readability चेक करने के लिए read-able tool का इस्तेमाल कर सकते हैं।
#2 – Mobile-Friendly Blog क्यों जरूरी है?
आज के डिजिटल युग में स्मार्टफोन हर किसी की पहली पसंद बन चुका है। ज्यादातर लोग अपनी क्वेरी सर्च करने और जानकारी प्राप्त करने के लिए मोबाइल का ही इस्तेमाल करते हैं। आंकड़ों के अनुसार, किसी भी ब्लॉग पर आने वाले लगभग 95% विज़िटर मोबाइल यूज़र्स होते हैं।
ऐसे में अगर आपका ब्लॉग Mobile-Friendly नहीं है, तो यूज़र का अनुभव खराब हो सकता है और वह आपकी साइट को छोड़कर कहीं और चला जाएगा।
यही कारण है कि अपने ब्लॉग को मोबाइल के हिसाब से डिज़ाइन करना न केवल ज़रूरी है बल्कि Google रैंकिंग और ट्रैफिक बढ़ाने के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण है।
#3 – Credibility क्या है और इसे कैसे दिखाएँ?
Credibility का हिंदी अर्थ है “विश्वसनीयता”। सरल शब्दों में कहें तो यह वह क्षमता है जिससे आप अपने पाठकों या ग्राहकों का विश्वास जीतते हैं।
ठीक reputation (प्रतिष्ठा) की तरह, विश्वसनीयता भी केवल इस बात पर निर्भर नहीं करती कि आप अपने बारे में क्या कहते हैं, बल्कि इस पर कि लोग आपके बारे में क्या सोचते और अनुभव करते हैं।
किसी भी ब्लॉग या वेबसाइट के लिए Credibility बहुत मायने रखती है, क्योंकि यही आपके ब्रांड की पहचान और भरोसा तय करती है।
यदि आप चाहते हैं कि लोग आपके ब्लॉग को पसंद करें और दोबारा विज़िट करें, तो आपको अपनी वेबसाइट को अधिक से अधिक विश्वसनीय बनाना होगा।
अपने ब्लॉग की Credibility बढ़ाने के लिए टिप्स:
- ब्लॉग की डिज़ाइन सिंपल और क्लीन रखें।
- Local SEO के लिए अपना Address और Contact Number ज़रूर डालें।
- यूज़र्स के लिए आपसे संपर्क करना आसान बनाएं।
- आर्टिकल्स में आसान और समझने योग्य भाषा का उपयोग करें।
- Grammar और Spelling की गलतियों से बचें।
- अपनी Niche से संबंधित Quality External Links जोड़ें।
इन तरीकों को अपनाकर आप अपने ब्लॉग की विश्वसनीयता बढ़ा सकते हैं और गूगल रैंकिंग के साथ-साथ यूज़र्स का भरोसा भी जीत सकते हैं।
#4 – Popups का उपयोग क्यों न करें?
क्या आप जानते हैं कि लगभग 70% यूज़र्स को Irrelevant Popups बेहद परेशान करते हैं? ऐसे पॉपअप न केवल यूज़र्स के पढ़ने के अनुभव को खराब करते हैं, बल्कि आपकी वेबसाइट का Bounce Rate भी बढ़ा देते हैं।
जब कोई विज़िटर आपके ब्लॉग पर किसी जानकारी के लिए आता है और बीच में बार-बार पॉपअप आ जाता है, तो उसका ध्यान भटक जाता है।
नतीजा यह होता है कि वह आपका आर्टिकल पढ़े बिना ही साइट छोड़ देता है। इससे आपकी वेबसाइट की Credibility और User Experience दोनों पर नकारात्मक असर पड़ता है।
हालाँकि कुछ परिस्थितियों में Popups काम आ सकते हैं, जैसे- किसी जरूरी जानकारी या ऑफर को दिखाने के लिए। लेकिन इनका इस्तेमाल हमेशा सोच-समझकर करें। अगर जरूरी न हो, तो Popups से बचना ही बेहतर है।
#5 – Page Speed को बेहतर कैसे करें?
अगर आप चाहते हैं कि आपका ब्लॉग Google में अच्छा रैंक करे और युजर्स उस पर ज्यादा समय बिताएँ, तो आपके पेज की स्पीड तेज होना बहुत जरूरी है।
चाहे आपका कंटेंट कितना भी अच्छा क्यों न हो, अगर पेज लोड होने में ज्यादा समय लगेगा तो विज़िटर तुरंत वेबसाइट छोड़ देंगे।
इसलिए Page Speed Optimization हर ब्लॉगर और वेबसाइट ओनर के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
नीचे कुछ आसान और असरदार टिप्स दिए गए हैं, जिनकी मदद से आप अपने ब्लॉग या वेबसाइट की स्पीड को बेहतर बना सकते हैं।
इमेज को Compress करें – ब्लॉग पोस्ट में इमेज डालने से पहले उन्हें Compress करें। इसके लिए आप WP Rocket जैसे टूल्स का इस्तेमाल कर सकते हैं, जो इमेज ऑप्टिमाइज़ेशन के साथ-साथ वेबसाइट की स्पीड भी बढ़ाते हैं।
अनावश्यक प्लगइन और थीम हटाएँ – जिन प्लगइन्स और थीम का आप उपयोग नहीं कर रहे, उन्हें तुरंत हटा दें। साथ ही, जिनका उपयोग कर रहे हैं उनके फास्ट और लाइटवेट विकल्प चुनें।
CDN का इस्तेमाल करें – Content Delivery Network (CDN) का उपयोग करने से आपकी वेबसाइट तेज़ी से लोड होती है क्योंकि यह आपके कंटेंट को दुनियाभर के सर्वरों पर कैश करता है।
JavaScript और CSS को Minify करें – JavaScript और CSS फाइल्स को छोटा करने से पेज का लोडिंग समय काफी कम हो जाता है।
Browser Caching Enable करें – इससे दोबारा विज़िट करने वाले युजर्स के लिए आपकी साइट तेज़ी से खुलेगी।
Lighthouse से टेस्ट करें – Google Lighthouse जैसे टूल्स का इस्तेमाल करके आप अपनी वेबसाइट की स्पीड और परफॉर्मेंस की पूरी रिपोर्ट देख सकते हैं और सुधार कर सकते हैं।
याद रखें, Fast Page Speed न सिर्फ SEO रैंकिंग को बेहतर बनाता है, बल्कि युजर्स का अनुभव भी शानदार करता है।
#6 – Internal Linking सही तरीके से करें
बाउंस रेट कम करने के लिए Internal Linking एक बेहद असरदार तरीका है। जब आप अपने आर्टिकल में संबंधित पोस्ट को सही जगह लिंक करते हैं, तो यूज़र को और भी ज़्यादा जानकारी मिलती है।
मान लीजिए आपका आर्टिकल SEO से जुड़ा है, तो उसमें अन्य SEO से संबंधित आर्टिकल को लिंक करना चाहिए। इससे जब कोई यूज़र आपका बाउंस रेट वाला आर्टिकल पढ़ेगा, तो वह आसानी से आपके अन्य SEO आर्टिकल्स पर भी क्लिक करेगा।
इस तरह Internal Linking न केवल बाउंस रेट कम करने में मदद करेगी, बल्कि आपकी वेबसाइट पर यूज़र का समय भी बढ़ाएगी और आपकी साइट को Google में बेहतर रैंक दिलाने में भी सहायक होगी।
#7 – Good Looking Blog कैसे बनायें?
अगर आप चाहते हैं कि आपके ब्लॉग पर आने वाले विज़िटर्स लंबे समय तक रुके रहें और आपके दूसरे पेजों को भी एक्सप्लोर करें, तो सबसे पहले आपके ब्लॉग का डिज़ाइन Good Looking और User Friendly होना चाहिए।
एक सरल, साफ़-सुथरा और आकर्षक डिज़ाइन न सिर्फ़ आपके ब्लॉग की पहली छाप (First Impression) को मजबूत बनाता है, बल्कि यह विज़िटर्स को दोबारा आपकी साइट पर आने के लिए प्रेरित भी करता है।
ब्लॉग को सुंदर और तेज़ बनाने के लिए आप GeneratePress थीम का इस्तेमाल कर सकते हैं। यह थीम हल्की (Lightweight), Mobile-Friendly और पूरी तरह Responsive होती है, जिसकी वजह से आपकी वेबसाइट जल्दी लोड होती है और Google Ranking में भी मदद करती है।
साथ ही, अपने कंटेंट की Font Size 16px से 18px के बीच रखें। यह साइज सबसे Readable और User Friendly माना जाता है, जिससे आपके विज़िटर्स को आर्टिकल पढ़ने में आसानी होगी।
संक्षेप में, एक Good Looking और SEO Friendly Blog आपके ट्रैफ़िक, यूज़र एंगेजमेंट और Google Ranking तीनों को बेहतर बनाता है।
#8 – Target Audience को पहचानें
अगर आप अपने ब्लॉग या वेबसाइट की सफलता चाहते हैं, तो सबसे पहले आपको अपने Target Audience को पहचानना होगा।
जब आप अपनी ऑडियंस की ज़रूरत और रुचि के अनुसार कंटेंट तैयार करते हैं, तो उनके आपकी साइट पर लंबे समय तक रुकने की संभावना बढ़ जाती है।
इसके लिए आपको समय-समय पर यह Analysis करना चाहिए कि आपके विज़िटर्स किस तरह के कंटेंट को ज्यादा पसंद कर रहे हैं और किन पेजों पर वे ज्यादा समय बिता रहे हैं।
इस काम के लिए आप Google Analytics और Google Search Console जैसे टूल्स का उपयोग कर सकते हैं।
अब तक आपने अच्छे से समझ लिया होगा कि Bounce Rate क्या है और Bounce Rate को कम कैसे करें। अगला महत्वपूर्ण सवाल यह है कि क्या Bounce Rate गूगल रैंकिंग फैक्टर है? आइए आगे इसे विस्तार से जानते हैं।
क्या Bounce Rate Google Ranking Factor है?
बहुत से ब्लॉगर्स और मार्केटर्स यह सवाल करते हैं कि क्या Bounce Rate एक रैंकिंग फैक्टर है? सीधा जवाब है – नहीं। गूगल ने कई बार स्पष्ट किया है कि Bounce Rate सीधे-सीधे आपकी वेबसाइट की रैंकिंग को प्रभावित नहीं करता।
लेकिन, कई रिसर्च और स्टडीज़ में यह पाया गया है कि जिन वेबसाइट्स का Bounce Rate ज्यादा होता है, उनकी रैंकिंग पर अप्रत्यक्ष असर ज़रूर पड़ सकता है।
यही वजह है कि इसे नज़रअंदाज़ करना सही नहीं है। दरअसल, High Bounce Rate इस बात का संकेत होता है कि आपकी साइट पर कुछ कमियाँ हैं, जैसे:
- वेबसाइट की लोडिंग स्पीड धीमी होना
- वेबपेज डिज़ाइन आकर्षक न होना
- कंटेंट और कीवर्ड्स का मेल न खाना
- मोबाइल ऑप्टिमाइज़ेशन की कमी
यानी, अगर आप चाहते हैं कि आपकी वेबसाइट पर विज़िटर ज्यादा समय बिताएँ और Google में आपकी रैंकिंग बेहतर बने, तो आपको Bounce Rate को सुधारने पर ध्यान देना चाहिए।
Bounce Rate और Exit Rate में क्या अंतर है?
जब भी हम किसी वेबसाइट या ब्लॉग के परफॉर्मेंस की बात करते हैं, तो अक्सर Bounce Rate और Exit Rate का नाम सामने आता है।
दोनों ही मैट्रिक्स साइट एनालिटिक्स में महत्वपूर्ण होते हैं, लेकिन इनके बीच एक बड़ा फर्क है। आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं:
Bounce Rate क्या है?
Bounce Rate उस प्रतिशत को दर्शाता है, जिसमें कोई यूज़र आपकी वेबसाइट के किसी एक पेज पर आता है और बिना दूसरा पेज देखे, सीधे वापस चला जाता है।
उदाहरण: मान लीजिए, कोई यूज़र आपके ब्लॉग पर एक आर्टिकल पढ़ने आता है। लेकिन वह बिना किसी और लिंक पर क्लिक किए, केवल उसी पेज से ब्राउज़र बंद कर देता है या बाहर निकल जाता है। इस स्थिति में वह “Bounce” कहलाएगा और उस पेज की Bounce Rate बढ़ जाएगी।
Exit Rate क्या है?
Exit Rate उस प्रतिशत को दिखाती है, जिसमें कोई विज़िटर आपकी साइट पर कई पेज देखने के बाद, किसी खास पेज से बाहर निकलता है।
उदाहरण: मान लीजिए, कोई यूज़र आपके ब्लॉग पर एक आर्टिकल पढ़ता है। फिर वह इंटरनल लिंक पर क्लिक करके दूसरे आर्टिकल पर पहुंच जाता है। अब उस दूसरे आर्टिकल को पढ़ने के बाद अगर वह आपकी वेबसाइट छोड़ देता है, तो यह Exit कहलाएगा।
Bounce और Exit का फर्क आसान भाषा में सभी Bounce, Exit होते हैं। लेकिन सभी Exit, Bounce नहीं होते।
यानी अगर विज़िटर केवल एक ही पेज देखने के बाद चला जाता है तो वह Bounce कहलाएगा। जबकि कई पेज देखने के बाद किसी पेज से बाहर निकलना Exit कहलाता है।
Bounce Rate और Exit Rate दोनों ही आपकी वेबसाइट के यूज़र बिहेवियर को समझने में मदद करते हैं। अगर Bounce Rate ज्यादा है, तो इसका मतलब है कि विज़िटर आपके कंटेंट या वेबसाइट डिज़ाइन से संतुष्ट नहीं है। वहीं, Exit Rate यह बताती है कि किस पेज से विज़िटर आपकी साइट छोड़ रहे हैं।
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निष्कर्ष – Bounce Rate Kya Hai
इस आर्टिकल में हमने आपको विस्तार से बताया कि Bounce Rate क्या है और इसे कम करने के लिए कौन-कौन से प्रभावी तरीके अपनाए जा सकते हैं।
उम्मीद है कि अब आपको इस टॉपिक से जुड़ी पूरी जानकारी मिल गई होगी और आप अपने ब्लॉग या वेबसाइट की Bounce Rate को बेहतर तरीके से समझकर उसे कम कर पाएंगे।
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Bounce Rate Kya Hai से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
Q1. Bounce Rate चेक करने के लिए कौन-सा टूल सबसे बेहतर है?
Bounce Rate मापने के लिए सबसे विश्वसनीय और लोकप्रिय टूल Google Analytics है। इसके माध्यम से आप आसानी से अपनी वेबसाइट का ट्रैफिक, यूज़र बिहेवियर और Bounce Rate देख सकते हैं।
Q2. Bounce Rate का मतलब क्या होता है?
Bounce Rate उस प्रतिशत को दर्शाता है, जिसमें विज़िटर्स आपकी वेबसाइट पर केवल एक ही पेज देखने के बाद बाहर निकल जाते हैं। यानी वे आपके ब्लॉग या वेबसाइट पर और आगे नहीं बढ़ते।
Q3. अच्छा Bounce Rate किसे कहा जाता है?
सामान्यतः 25% से 40% Bounce Rate को अच्छा माना जाता है। यह दर्शाता है कि आपकी वेबसाइट पर यूज़र्स कंटेंट पढ़ने में रुचि ले रहे हैं और अन्य पेज भी विज़िट कर रहे हैं।
Q4. Bounce Rate कम करने के लिए क्या करना चाहिए?
Bounce Rate कम करने के लिए आप निम्न उपाय अपना सकते हैं: Engaging और Quality Content लिखें। सही और उपयोगी Internal Linking करें। Relevant Keywords को Target करें। वेबसाइट का Navigation आसान और User-Friendly बनाएं।